अपनी बात
January 29, 2019 • हनुमत कृपा- दिसम्बर 2015

अपनी बात


          बीते तीन दशक के पत्रकारिता के पेशे में गिनती के मौके आये जब मन से पत्रकार-धर्म निभा पाया। विश्वविद्यालयी छात्र जीवन से सीधे पत्रकार बने मन में बड़ी खुशी थी कि ईश्वर ने मुझे कर्म क्षेत्र में वही जिम्मेदारी सौंपी जो मैं चाहता था। लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के तौर पर स्थापित पत्रकारिता से जुड़े लोगों को समाज में मान-सम्मान तो मिलता ही है, बड़े-बड़े पदों पर बैठे विशिष्टजनों से मिलने व बातचीत करने का मौका भी मिलता है। लेकिन रुंधे गले से कहना पड़ रहा है कि देश का नंबर वन हिन्दी अखबार रहा हो या फिर सबसे बड़े औद्योगिक घराने का समाचार पत्र, किसी में नौकरी करते हुए मन को शान्ति नहीं मिली। अखबार की नीतियों व व्यावसायिक पत्रकारिता की मजबूरियों के चलते न समाज में व्याप्त बुराइयों को ईमानदारी से उजागर कर सका और न ही जरूरतमंदों को समय से न्याय दिला सका। प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक के बेटे होने के नाते बचपन में मिले संस्कारों ने पेशे की उन बुराइयों से भी दूर रखा जिनका सहारा लेकर तथाकथित बड़े पत्रकार शासन-सत्ता में नजदीकी बनाने में कामयाब हो जाते हैं। जीवन के उत्तरार्ध में लगा कि अब तक का जीवन तो नौकरी करने व परिवार पालने में बीत गया। कुछ ऐसा किया जाये जिससे मन को शान्ति मिले और खुद को लगे कि बेहतर समाज के लिए सार्थक पहल की जा रही है। भारतीय संस्कृति में हर शुभ कार्य की शुरुआत ईष्टदेव की पूजा से होती है। बाल्यकाल से भगवान श्रीराम व भक्त हनुमानजी मेरे आराध्य रहे हैं। उन्हीं के आशीर्वाद से आध्यात्मिक मासिक पत्रिका ‘हनुमत कृपा’ का पहला अंक आपके हाथ में है। प्रयास है कि भक्तों की अनुभूतियां पाठकों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकें। पत्रिका पढ़कर एक भी श्रद्धालु हनुमानजी के जीवन दर्शन का एक भी हिस्सा अपने जीवन में उतारकर भगवान श्रीराम के चरणों में अर्पित कर सका तो मैं अपना प्रयास सौ फीसदी सार्थक मानूंगा। हनुमानजी के जीवन से संबंधित जानकारियां व भक्तों की अनुभूतियों को हर माह की पत्रिका में प्रकाशित किया जाना है। अनुरोध है कि हनुमानजी से जुड़े लेख व फोटो निःसंकोच भेंजे ताकि उन्हें अगले अंक में प्रकाशित कर देशभर में फैले हजारों श्रद्धालुओं के पास भेजा जा सके।
          हनुमत कृपा मीडिया का यह पहला पुष्प है। जल्दी ही कलमकार समाज से जुड़ी मासिक पत्रिका ‘पत्रकार परिवार’ भी आपके पास होगी। इसमें हिन्दी अखबारों के संपादकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के संवाददाताओं तक के परिवार की उन प्रतिभाओं की खूबियां को प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा, जिन्हें घर के खबरनवीस होते हुए भी अखबारों में जगह नहीं मिल पाती।

जय श्रीराम । जय हनुमान ।

नरेश दीक्षित