जब गोमती की बाढ़ में बह गया हनुमान मंदिर
July 22, 2019 • श्यामलाल कपूर

जब गोमती की बाढ़ में बह गया हनुमान मंदिर

              करीब छह दशक पहले लखनऊ शहर में बहती गोमती नदी में इतनी जबर्दस्त बाढ़ आई थी कि बाबा नीब करोरी महाराज का बनवाया हनुमान मंदिर भी बह गया था। बाढ़ में बची थी तो सिर्फ हनुमान जी की मूर्ति। इस भीषण बाढ़ में मंदिर की वह दीवार में बह गयी थी जिसमें हनुमान जी की सीमेंट की मूर्ति बनाई गयी थी। यह बात बाबा जी के परमभक्त व संकट मोचन हनुमान जी मंदिर ट्रस्ट एवं बाबा नीब करोरी जी महाराज आश्रम के पूर्व सचिव श्याम लाल कपूर ने बताई। पूज्य गुरुदेव जी का आशीर्वाद लेने आज भी रोज मंदिर आने वाले 89 वर्ष के बुजुर्ग कपूर जी ने बताया कि वर्ष 1960 में ज़ब गोमती में बाढ़ आई थी उस समय सूबे के मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्ता थे। उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्री बाबा जी के भक्त थे। बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री ने पहाड़ के रहने वाले लोनिवि मंत्री से कहा कि तुम्हारे बाबा का मंदिर तो ढह गया। बाबा के हनुमान जी तो गये। उन्होंने तुरंत आकर बाबा जी को मुख्यमंत्री द्वारा मंदिर व हनुमान जी के लिए कही बात बताई। गुरुदेव लेटे थे, एकाएक उठकर बैठ गये और बोले हनुमान जी कहीं नहीं जाते, कह दे अपने मुख्यमंत्री से। थोड़े दिन बाद बाढ़ का पानी निकल जाने पर लोगों ने देखा कि मंदिर तो बह गया पर हनुमान जी की मूर्ति ज्यों की त्यों ख़डी थी। मूर्ति की साफ सफाई कर फिर से मंदिर तो बन गया लेकिन मंदिर व हनुमान जी पर व्यंग्य करने वाले मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्ता की सरकार कुछ ही दिनों बाद गिर गयी। 


              एनबीआरआई में उप निदेशक रहे कपूर जी का कहना है कि बाबा जी ज़ब लखनऊ आते थे तो लाटूश रोड स्थित उनके मामा सूर्य नारायण महरोत्रा के घर पर ही रहते थे। वहीं गुरुदेव से मिलने आने वालों की भीड़ जुटती थी। बचपन में पढ़ाई के लिए वह भी वहीं रहते थे। ज़ब वह कक्षा सात में थे पहली बार बाबा को मामा के घर पर देखा था। सुबह उठते ही बाबा जी के पैर छूकर ही और काम करना होता था।  एमएससी करने के बाद प्रशासनिक सेवा की तैयारी की और प्रतियोगी परीक्षा में बैठे लेकिन एक नंबर कम रह जाने से इंटरव्यू में नहीं बुलाया गया। इसी दौरान बाबा जी का घर पर आना हो गया। परिवार के बड़ों की मौजूदगी में मेरी पेशी हुई। बाबा जी कहा एक नंबर से रह गया। अच्छा हुआ आईएएस की नौकरी अच्छी नहीं। तूने एमएससी किया है, रिसर्च कर। कुछ दिन बाद ही एनबीआईआर में नौकरी लग गयी। कपूर जी का कहना है कि आज वह जो भी हैं, बाबा जी के आशीर्वाद से ही हैं। गुरुदेव का शरीर भले नहीं है लेकिन इनकी कृपा हमेशा रहती है जिसका एहसास ज़ब तब होता रहता है। 

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श्यामलाल कपूर

लखनऊ