जब बाबा ने मेरा मकान बनवाया
September 6, 2019 • विनय माथुर (ध्रुव)

जब बाबा ने मेरा मकान बनवाया
गुरुदेव महाराज की जय

         बाबा नीब करोरी महाराज के दर्शन मैंने जब से होश सम्भाला तब से 1971 फरवरी शिवरात्रि का दिन इलाहाबाद कटरा में अन्तिम बार करे थे। जब भी महाराज जी मेरे मामा स्व. विशन शंकर माथुर की कोठी पर आते थे तो सभी लड़के लड़कियां छुप जाते थे कि पता नहीं बाबा किस की क्या पोल सबके सामने खोल दें। डर-डर के चरण स्पर्श करते थे, बाबा कह देते थे कि पढ़ता नहीं है, फेल हो जायेगा। पढ़ाई करा कर, वहाँ घूमने क्यों जाता है। बाबा जी के पास ज्यादा खड़ा होने हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।
 सन् 1979 की जनवरी मे मेरी शादी हुई थी। पत्नी को लेने एक बार माह सितम्बर 79 में झांसी गया। वहॉं पर समय व्यतीत करने के लिए मैंने पत्रिका निकाली तो कादम्बिनी पत्रिका में बाबा नीब करोरी महाराज की फोटो और चमत्कारिक बाबा नीम करोरी लेख पढ़ा। क्यांकि मैं बाबा को जानता था तो पढ़ने में मजा आता रहा। चलते वक्त पता नहीं क्या दिमाग में आया कि यह पुस्तक मैं अपने साथ आगरा ले चलूं वरना यहाँ तो रद्दी में बिक जायेगी। इसमें महाराज जी की फोटो भी छपी है किसी के पैरों के नीचे न आये कहां चली जाए सोच अपने साथ आगरा ले गया और उसे सुरक्षित स्थान पर रख दिया। जब मैं किराये के मकान में रहता था। मकान खाली करने समय पुरानी रद्दी का निस्तारण करा परन्तु वह किताब नहीं बेची तीनों मकान में वह मेरे पास सुरक्षित रही। एक दिन बाबा मेरे स्वप्न में आए और बोले कि तू अपना मकान बना। मैंने कहा बाबा मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं मकान बनवा सकूं। बोले मैं कह रहा हूँ तू मकान बना अपना। प्रातःकाल उठकर मैंने यह सपना अपनी पत्नी को सुनाया तो वह कहने लगी कि क्या आपने कभी बाबा को देखा हैं तब मैंने कहा कि हाँ देखा है खूब दर्शन करे है। 1975 में मैंने आवास विकास कालोनी में मकान लेने के लिए रू. 500 जमा करे थे कि जब भी लाटरी में मेरा मकान निकलेगा तो ले लूंगा किश्त हर महीने देता रहूँगा। मैं और मेरी पत्नी आवास विकास कालोनी गये कि पता करके आते है कि मकान कब तक निकल रहे है। वहां बड़े बाबू से बात करी तो वह बोले कि नकद खरीदने वालो के निकल रहे हैं आप फार्म भर दें तो दो चार दिन में लाटरी निकलेगी तो आपका भी निकल आयेगा। कुछ सेवा करनी पडे़गी। मैंने हां कर दी और फार्म भर दिया कि बाबा ही पैसे का इन्तजाम करेंगे। दूसरे ही दिन बड़े बाबू मेरे घर आए और बोले कि आपका मकान निकल आया है आप ऑफिस आकर अपना लेटर ले ले। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आज फार्म भरा और कल मकान निकल आया। हम लोग आवास विकास आफिस गये वहॉं हमें आवंटित मकान का कब्जा लेने और करीब एक लाख रूपया निश्चित समय तक जमा करने को कहा गया था।


         मेरे पास तो हजार रूपये भी नहीं थे। इतनी बड़ी रकम कैसे जमा करूं। मैंने सरकार से मकान क्रय के लिए लोन मांगा जो मुझे एक सप्ताह के अन्दर मंजूर हो गया। अपने जी.पी.एफ. से कुछ पैसे निकला कुछ पैसा अपने रिश्तेदारों से लेकर मकान क्रय तो कर लिया अब उसे पूरा भी कराना था जो अधूरा था। पता नहीं मेरे पास कहां से कितने रूपये आते गये और मेरा मकान तैयार हो गया। यह सब बाबा की कृपा का फल था। आसान बात है सब खेल बाबा जी का था। आज महाराज जी की कृपा से मेरे पास पांच कमरों का डुप्लेक्स मकान है। तब ही से मैं महाराज जी की पूजा करने लगा। मेरी पूजा में गुरुदेव विराजमान है। उनकी ही कृपा का मैं आज पात्र हूँ। मेरा जीवन भी गुरूदेव का दिया हुआ है यह कथा मैं दूसरी बार प्रकाशन कराऊंगा कि महाराज जी ने मेरी बीमारी अपने ऊपर कैसे ले ली।
गुरूदेव भगवान की जय। 

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विनय माथुर (ध्रुव)
जयपुर (राजस्थान) 
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