मुझको जमीन और आसमान मिल गए गुरु क्या मिले भगवान मिल गए
August 13, 2019 • अमित सिंह

मुझको जमीन और आसमान मिल गए

गुरु क्या मिले भगवान मिल गए

          आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ मे आती है। इस दिन से चार महीने तक साधु संत एक ही स्थान पर रह कर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी बहुत अच्छे माने जाते हैं न अधिक गर्मी न अधिक सर्दी सामान्य मौसम रहता है। इसीलिए ये अध्ययन के लिए भी अच्छे माने जाते हैं। आज के ही युग की बात करुं तो जून महीने की गर्मी मे जैसे स्कूल बंद रहते हैं और अब जुलाई में स्कूल को खोल दिया जाता है। जैसा कि पहले कहा कि अध्ययन के लिए अब से चार महीने बहुत अच्छे माने जाते हैं। जैसे सूर्य के ताप से तपत भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है। वैसे ही गुरु के चरणों में उपस्थित साधक को ज्ञान शक्ति भक्ति और योग शक्ति प्रदान करने की शक्ति मिलती है।


          इस दिन महाभारत के रचयिता श्री कृष्ण द्वापयान महाऋषि वेद व्यास जी का जन्मोत्सव भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान भी थे और इन्होनें चारां वेदों की रचना भी की थी। इस कारण इनका नाम महाऋषि वेद व्यास पड़ा। इनको आदिगुरू भी कहा जाता है और इनके सम्मान मे गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
          शास्त्रों में 'गुरु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और 'रु' का अर्थ बताया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसीलिए कहा जाता है कि वो अज्ञान तिमिर का ज्ञानाजन- शलाका से निवारण कर देता है अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा गया है।
          जीवन में बहुत भटकाव है खास तौर पर जब हम सचे गुरु की तलाश करते हैं। लेकिन बहुत ही किस्मत का धनी वही व्यक्ति है जिसे आज के युग में सच्चे सतगुरु की प्राप्ति बहुत ही आसानी से हो गयी है। कहते है “मुझको जमीन और आसमान मिल गए गुरु क्या मिले भगवान मिल गए“। लेकिन मैं यदि अपना अनुभव कहु तो मुझे 10 सितम्बर, 2018 को पहली बार फेसबुक के माध्यम से “पूज्य हनुमान स्वरूप बाबा नीब करोरी महाराज“ के पहली बार दर्शन हुए उस वक़्त मैं किसी परेशानी मे चल रहा था जब रास्ते भी बंद नज़र आ रहे थे। अचानक मन मैं आया परेशानी क्यों ना बाबा से ही कह दूं। फिर क्या चिंता की बात रह गयी करुणा निधान की तब करुणा देखने को मिली। परेशानी के बादल जीवन से हटना शुरू हो गए सच कहूं तो मैंने बाबा को गुरु रूप मे नहीं भगवान् रूप में ही तब से हमेशा देखा। बाबा बहुत दयालु हैं। आज भी बाबा हर उस भक्त के साथ हमेशा है जो बाबा जी के संपर्क मे है। बाबा जी की कृपा को शब्दों मे बयान करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है हर वक़्त हो रही कृपा को कोई कैसे बयान कर सकता है कितना बता सकता है।

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अमित सिंह
लुधियाना, पंजाब