वन्दना
July 19, 2019 • कवि जगन्नाथ दीक्षित निर्दोष

वन्दना

जयति जयति अंजनि लला, जय जय श्री महावीर।
हनुमत कृपा से दूर हों,आरत जन की पीर।।१।।
पवनपुत्र पर हेतु को,धारेव जग अवतार।
हनुमत कृपा से होत है, सबका बेड़ा पार।।२।।
मान रखें निज दास को, देत सदा सम्मान।
हनुमत कृपा से लोग लघु, पल में होत महान ।।३।।
जो जन अर्चत अहर्निश, पवनतनय के पाँव।
हनुमत कृपा की जीव पर, जीवन भर रहे छाँव।।४।।
अष्ट सिद्धि नव निद्धि के, दायक श्री हनुमान।
हनुमत कृपा से होत है, सब विधि सब कल्यान।।५।।
रोग दोष तन के मिटे, होवत मन परसन्न।
हनुमत कृपा से भक्त गृह, हो धन धान्य सुअन्न।।6।।
खोई को पाई करें, पाई खोवत नाय।
हनुमत कृपा से रिद्धि सिद्धि, भरें भवन में आय।।7।।
निकट न आवत है कबहुँ, दुर्दिन अरु दुष्काल।
हनुमत कृपा के होत खन, भगे काल तत्काल।।8।।
सदा हरत जड़ बुद्धि को, भरत सबुद्धि सो कोष।
हनुमत कृपा की प्राप्ति हित, चरण शरण निर्दोष।।9।।

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कवि जगन्नाथ दीक्षित निर्दोष
बसन्तपुर, भिटौली, बाराबंकी, उत्तरप्रदेश