विजेथुआ महावीरन
January 29, 2019 • अनीता तिवारी

श्रद्धा का केन्द्र : विजेथुआ महावीरन

           वैसे तो उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में कई आस्था के केंद्र है। लेकिन सबसे पुरानी तहसील कादीपुर में एक ऐसा हनुमान मंदिर है जिसके चर्चे हर तरफ हैं। यहाँ आने मात्र से न सिर्फ मनोकामनायें पूरी होती हैं बल्कि सभी बिगड़े काम भी बन जाते हैं। मंदिर विजेथुवा महावीरन धाम के नाम से जाना जाता है।
           इस मंदिर में हनुमान जी की एक मूर्ति विराजमान है। हनुमान जी की मूर्ति का एक पैर जमीन में धंसा है। जिसकी वजह से मूर्ति थोड़ी तिरछी है। यह माना जाता है कि मूर्ति को सीधा करने के लिए इसके आसपास 100 फ़ीट की खुदाई की गई थी लेकिन मूर्ति का दूसरा सिरा नहीं मिला। अध्यात्म और ज्योतिष में अच्छी पैठ रखने वाले क्षेत्र के युवा समाजसेवी ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह ’रवि’ बताते हैं कि यहां हनुमानजी की मूर्ति दक्षिण मुखी है जो साधना व कर्मकांड के सम्बंध में बेहद महत्वपूर्ण है । मंदिर के निकट एक पक्का तालाब स्थित है जहां हनुमान जी ने कालनेमि के वध से पहले स्नान किया था। बताया जाता है कि इस तालाब का नाम मकरी कुंड है, और लोग मंदिर में दर्शन करने के पूर्व इस कुंड में स्नान करते हैं। ये भी कहा जाता है कि इस कुंड में स्नान करने से लोगों के पाप कट जाते हैं। रामायण में इस स्थान का जिक्र है कि जब श्रीराम और रावण के बीच चल रहे युद्ध में लक्ष्मण जी को बाण लगा और वो मूर्छित हो गए तो वैद्यराज सुषेण के कहने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की तरफ चले। हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने में असफल हो जाएं इसके लिए रावण ने अपने एक मायावी राक्षस कालनेमि को भेजा, ताकि वो रास्ते में ही हनुमान जी का वध कर दे। कालनेमि मायावी था और उसने एक साधु का वेश धारण कर रास्ते में राम-राम का जाप करना शुरू कर दिया। थके-हारे हनुमान जी राम-राम धुन सुन कर वहीं रुक गए। रामायण के अनुसार साधू के वेश में कालनेमि ने हनुमान जी से उनके आश्रम में रुक कर आराम करने का आग्रह किया। हनुमान जी उसकी बात में आ गए और उसके आश्रम में चले गए। उसने हनुमान जी से आग्रह किया कि वह पहले स्नान कर लें उसके बाद भोजन की व्यवस्था की जाए। हनुमान जी स्नान के लिए तालाब में गए जहां मगरी(मकरी) ने हनुमान जी को कालिनेमि की सच्चाई बताई । मकरी का उद्धार करने के बाद हनुमान जी ने कालिनेमि का वध कर उसपर विजय पाई । युवा साहित्यकार ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह’रवि’ बताते हैं कि हनुमान जी द्वारा विजित हुआ यह स्थान कालांतर में विजेथुआ के नाम से जाना गया। हर मंगलवार को यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। शनिवार को भी काफी भीड़ होती है। इसके अलावा भी प्रतिदिन लोग यहां दर्शन पूजन हेतु आते हैं।
           सुलतानपुर जिला मुख्यालय से लखनऊ बलिया राजमार्ग पर चालीस किलोमीटर चलकर कादीपुर तहसील मुख्यालय पहुंचा जा सकता है वहां से सात किलोमीटर पर सूरापुर बाजार है जहाँ से दो किलोमीटर दूरी पर विजेथुआ महावीरन धाम है। यह स्थान अभी रेल मार्ग या हवाई मार्ग से नहीं जुड़ा है। प्राइवेट सवारियां आवागमन हेतु उपलब्ध रहती हैं। निजी वाहन से भी आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है।

अनीता तिवारी
सुल्तानपुर