संपादक की कलम से
January 29, 2019 • नरेश दीक्षित

संपादक की कलम से

यह वर माँगहु कृपा निकेता...

दिसम्बर 2015


            रघुवंशमणि भगवान श्रीराम व भक्तशिरोमणि हनुमानजी देश ही नहीं, दुनिया के सर्वमान्य देवता हैं। पूरे विश्व में जितने मंदिर श्रीराम व हनुमानजी के होंगे, शायद ही किसी अन्य हिन्दू देवी-देवता के हों। हनुमानजी की कृपा के बिना श्रीराम का आशीर्वाद मिलना असंभव है। इसीलिए विवेकशील भक्तजन हमेशा हनुमानजी की सेवा में लगे रहते हैं। उनका मानना है कि जीवन की हर समस्या का हल संकटमोचन के पास मौजूद है। यदि भक्ति सच्ची है तो भक्त को जीवनभर अपने बारे में सोचने की जरूरत ही नहीं है। आज की आपाधापी की जिन्दगी में भौतिकता का बोलबाला है। हर कोई सुबह जगने से लेकर रात को सोने तक सिर्फ पैसा कमाने के बारे में ही सोचता है। लेकिन नतीजा वही ‘ढाक के तीन पात’। किसी को शान्ति नहीं है। कोई धन की अधिकता से परेशान है तो कोई धन की कमी से बेबस। इस भागमभाग की जिन्दगी में सुख-चैन कहीं खो सा गया है। भोग विलास की वस्तुओं का तो अम्बार लगा है लेकिन सुकून गायब हो गया है। इसकी बड़ी वजह आम लोगों में आध्यात्मिकता की कमी का होना है।
            आध्यात्म जीवन का मूल है। धर्मशील व्यक्ति द्वारा किये गये कार्य अनैतिक हो ही नहीं सकते। भौतिक संपन्नता की होड़ में नैतिकता खत्म होती जा रही है। हर क्षेत्र में गिरावट की यही वजह है। नौकरशाह हो या राजनेता घोटालों में फंसते जा रहे हैं। करोड़ों-अरबों की काली कमाई के पुख्ता सुबूत मिलने पर जेल जाते वक्त भी उन्हें शर्म नहीं आती। सेना के अफसर धन के लालच में गोपनीय सूचनाएं दुश्मन देशों को दे रहे हैं। नेता-नौकरशाह व ठेकेदार माफिया का गठबंधन मजबूत होता जा रहा है। इतना सब होने के बावजूद कोई सुखी नहीं है। सब परेशान हैं, किसी को शान्ति नहीं।
            सच्ची शान्ति व सुख ईश्वर की शरण में जाने से ही मिलता है। अकेले में बैठकर अपने ईष्ट का ध्यान करने से कितनी शान्ति मिलती है। हनुमानजी बेहद सरल है। भक्त के मन की बात न सिर्फ बहुत जल्दी जान लेते हैं बल्कि उसे पूरा भी कर देते हैं। इसीलिए भक्तों में जितना मान-दान हनुमानजी का होता है उतना अन्य देवताओं का नहीं। बजरंगबली का नाम लेकर शुरू किये गये कार्य बिना विघ्न बाधा के पूरे हो जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जहां कहीं भी रामकथा होती है, हनुमानजी वहां खुद व खुद पहुंच जाते हैं। पूरी सृष्टि में कोई ऐसा स्थान नहीं है जहां बजरंगबली की मौजूदगी न हो। हर धर्म, वर्ग व संप्रदाय के लोग हनुमानजी की सत्ता स्वीकारते आये हैं और भविष्य में भी स्वीकार करते रहेंगे। ऐसा विश्वास है।

नरेश दीक्षित