सिद्ध महात्मा हैं नारायण स्वामी
September 29, 2019 • राजेश कौल

सिद्ध महात्मा हैं नारायण स्वामी

          पूज्य बाबा नीब करौरी महाराज के प्रिय बाबा नारायण स्वामी सिद्ध महात्मा हैं। आज के पांच दशक पहले देश के प्रमुख उद्योगपति युगुल किशोर बिड़ला ने बाबाजी के कहने पर दिल्ली के सिविल लाइन क्षेत्र में कश्मीरी गेट बेला रोड स्थित श्री हनुमान बिड़ला मंदिर में पूजा व सेवा की जिम्मेदारी सौंपी थी जिसे 96 वर्षीय बाबा नारायण स्वामी ने पूरी निष्ठा से निभाया। बढ़ती उम्र के बावजूद दिमाग से पूरी तरह स्वस्थ स्वामी जी ने बताया कि 4 दिसम्बर, 1965 में बाबा नीब करौरी महाराज की कृपा से दिल्ली के यमुना तट पर युगुल किशोर बिड़ला द्वारा बनवाये गये हनुमान मंदिर का शिलान्यास तब के गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने किया था। बिड़ला परिवार तो बाबा नीब करौरी महाराज का भक्त था ही, गृहमंत्री नंदा जी भी बाबा जी के सच्चे भक्त थे। उसी दौरान बिड़ला जी ने नारायण स्वामी को श्री हनुमान बिड़ला मंदिर व श्री हनुमान आश्रम का व्यवस्थापक नियुक्त कर दिया था। इससे पहले वह बिडला मंदिर में सुबह शाम रामायण कथा का प्रवचन करते थे। करीब पचास साल श्री हनुमान बिडला मंदिर में पूजा कार्य करने के बाद अब बढ़ती उम्र में बाबा नारायण स्वामी जी ने मंदिर में पूजा सेवा की जिम्मेदारी बेटे पंडित गोपाल स्वामी को सौंप दी है। जो मंदिर की सेवा पूजा, भण्डार आदि की व्यवस्था करते हैं। बीते पखवारे मंदिर परिसर में हुई मुलाकात में स्वामी जी ने बताया कि गुरुदेव महाराज की कृपा से हर मंगलवार व रविवार को मंदिर में भक्तजनों द्वारा श्री हनुमान चालीसा व सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता हैंं। इस कार्यक्रम में दिल्ली समेत आसपास के भी हनुमान जी व बाबा नीब करौरी महाराज जी के सैकड़ों भक्त शामिल होते हैं और हर तरह से सहयोग भी करते है।


          स्वामीजी को सुन्दरकाण्ड समेत पूरी रामचरितमानस कण्ठस्थ है। पांच दशक पहले महाराजजी ने कहा था कि उनका जन्म ही हनुमान जी की सेवा के लिए हुआ किसी और की नौकरी के लिए नहीं। मंदिर की जिम्मेदारी बेटे गोपाल स्वामी को सौंपने के बाद बाबा खुद महरौली क्षेत्र के डीडीए पार्क में बने प्राचीन बन देवी मंदिर में रहकर साधना में लीन रहते हैं। जो भक्त बाबा जी से मिलने की खास चाहत रखते है, वह सिर्फ चुनिन्दा भक्तों से मिलते हैं और सीमित वार्ता करते हैं। बाबा नीब करौरी महाराज की बात करते ही भावुक हो जाते हैं और कहते है कि बाबा जी आज भी भक्तों के बीच मौजूद रहते हैं। इसका अहसास सिर्फ उन्हीं भक्तों को होता है जिन पर उनकी विशेष कृपा होती है। 

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राजेश कौल दिल्ली