बाबा का चमत्कार
October 11, 2019 • श्रीमती मंजू साह
बाबा का चमत्कार

          संतों की महिमा अपरंपार है। वे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सदा हमारे आस पास रहकर ईश्वर की समस्त इच्छानुरूप शुभ कार्य में हमारी मदद करते हैं। मन की पुकार जितनी श्रृद्धा एवं विश्वास से होगी संत हृदय उतनी ही सरलता से पिघल कर हमारे लिये कृपालु हो जाते हैं और किसी न किसी रूप में हमारे पास आकर कृपा बरसाते हैं। प्रसिद्ध संत नीब करौरी महाराजजी ने नैनीताल शहर के समीप ही हनुमानगढ़ी मंदिर का निर्माण करवाया। यह उत्तराखंड में महाराजजी द्वारा स्थापित प्रथम मंदिर है। नैनीताल आने वाले अधिकांश सैलानी यहां पर आकर प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक आनंद उठाते हैं। 
          यहां पर हर रोज हनुमान चालीसा का पाठ तथा प्रत्येक मंगलवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ एवं भजन कीर्तन होते हैं। प्रत्येक नवरात्रि में रामनवमी के दिन भण्डारे का आयोजन किया जाता है। कहते है बहुत साल पहले महाराजजी ने 'राम नाम' संकीर्तन करवा कर तत्पश्चात् भण्डारे का आयोजन किया। प्रसाद बनाते समय 'घी' कम पड़ गया। महाराजी ने पानी भरा कंनस्तर उठाकर कढा़ई में डलवा दिया और सबसे कह दिया यह घी है। पानी में ही घी के स्थान पर सुस्वाद पकवान बने और प्रसाद का वितरण किया गया। भण्डारा खत्म होने के पश्चात भी प्रसाद बच गया। उपस्थित जन समूह ने पूछा महाराजजी प्रसाद बच गया है तो महाराजजी ने उन्हें आश्वस्त किया और अपनी मोहिनी मुस्कान में मुस्कुरा दिये। थोड़ी ही देर में कुछ बच्चों का झुण्ड वहां पर पहुंचा और शेष प्रसाद उन बच्चों को समान रूप से वितरित कर दिया गया। भक्तजन यह चमत्कारिक खेल देखकर नतमस्तक हो गये।

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श्रीमती मंजू साह
नैनीताल