राम जन्म का सांस्कृतिक और दार्शनिक पक्ष
March 21, 2020 • अशोक पाण्डेय

राम जन्म का सांस्कृतिक और दार्शनिक पक्ष

अखंड ब्रह्मांड नायक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को अपनी ही नगरी अयोध्या में एक अदद आशियाना मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है । देश की सबसे बड़ी अदालत में रामलला को न्याय मिल गया है।जिनकी अदालत में जड़,जंगम,स्थावर सभी को न्याय मिलता है,उस प्रभु श्रीराम को अपने ही राज्य में वर्षों तक टेंट में बिताना पड़ा।यह बताना पड़ा कि उनका जन्म यहीं हुआ है।अयोध्या उन्हीं के पुरखों की बसाई गई नगरी है।जिन लोगों ने उनका मंदिर तोड़ा,वे तो नहीं रहे,लेकिन उनके अनुयाइयों ने तो कोर्ट तक मेंयह सवाल उठाया कि राम अयोध्या में पैदा ही नहीं हुए।अयोध्या जो आज है,यह वह अयोध्या नहीं,जिसमें  राम पैदा हुए थे।इतने सवाल कि पूछो मत।रामलला के मंदिर के लिए लाखों हिंदुओं ने अपने प्राणों की आहुति दी।कई राजाओं और उनके सैनिकों ने मुगल सेना से रामजन्मभूमि के लिए जीवन की अंतिम सांस तक संघर्ष किया। अब जब सर्वोच्च न्यायालय से भगवान राम को न्याय मिल गया है और उसके निर्देश पर  नए निर्माण ट्रस्ट का गठन भी हो गया है।यहां तक कि राम लला निर्माण की तिथि भी लगभग तय हो गई है।लेकिन इस सब चक्करों में रामलला को कितनी परेशानी हुई,यह किसी से छिपा नहीं है।अदालत में वर्षों मुकदमा चला और जब निर्णय रामलला के पक्ष में आया तब भी उसे नकारने के प्रयास कम नहीं हुए। न्यायालय की निष्ठा और तटस्थता पर भी सवाल खड़े किए गए ।ऐसा भारतीय लोकतंत्र में ही संभव है।ईश्वर का  भक्तों को सुस्पष्ट आश्वासन है कि जब भी धररती पर पाप का घड़ा भरता है,उसे फोड़ने के लिए में इस धारा धाम पर अवतरित होता हूँ।जब जब होई धर्म की हानी।बाढ़े असुर अधम अभिमानी।तब तब धरि प्रभु मनुज सरीरा।हरहिं सदा संतान की पीरा। राम का अवतार रावण और कुम्भकर्ण जैसे महाबली असुरों के विनाश के लिए हुए था । संसार मे धर्म की स्थापना के लिए हुए था। ब्रह्म विचार के प्रचार और प्रसार के लिए हुआ था । विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार । मतलब भगवान राम का अवतार सज्जनों की रक्षा के लिये हुआ था। जब धरती पर व्यक्ति की आज़ादी खतरे में थी तब भगवान राम व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अवतरित हुए थे। विभीषण ने रावण को समझते हुए कहा था कि राम सामान्य मनुष्य नही हैं वे संसार के मालिक हैं और कालों के भी काल हैं तात राम नही नर भूपाला। भुवनेस्वर कलह कर काला यही बात मंदोदरी ने भी रावण को समझने की कोसिस की लेकिन जिसके सिर पर अहंकार चढ़ कर नाच रहा हो , उसे नीति और विवेक की बातें अच्छी  नही लगती।मंदोदरी ने कहा था कि जिस दिन से सीता आयी है आ गया शीत निसिचर गण में , जानकी जानकी लेवा है यह नही समझते क्यों रण में।लेकिन अहंकार के वशीभूत रावण ने उसका भी तिरस्कार किया विद्वानों का कहना है कि भगवान राम के आचरण को जीवन मे उतारना चाहिए और भगवान श्री कृष्ण के कथन पर अमल करना चाहिए। जो समाज ऐसा नही करता , विनष्ट हो जाता है। भगवान राम ने अपने अवतार में केवल जानकी के अपहरण का ही रावण से बदला नही लिया बल्कि उन्होंने अपनी माता कौशल्या के अपहरण का भी रावण से बदला लिया इसे यूं देखा जा सकता है कि भगवान राम के अवतार के समय उनके बाएं अंग फड़कने लगे बाम अंग फरकन लगे यह इस बात का अपनी माँ को भरोसा है कि वह रावण द्वारा किये गए कौशल्या के अपमान का बदला जरूर लेंगे  रावण ने एक बार ब्रम्हा जी से पूछा कि उसकी मृत्यु कैसे होगी ब्रम्हा जी ने कहा कि त्रेता युग मे अयोध्या नरेश दशरथ और कौशल में जननी कौशल्या के संयोग से भगवान राम का जन्म होगा और वही तुम्हारा अंत करेंगे रावण ने यह भी पूछा कि उन दोनों का विवाह कब होगा तब ब्रम्हा जी ने उसे वह तिथि भी बता दी विवाह की तिथि से पहले ही रावण ने विधि के विधान को चुनौती देने के लिए दशरथ और कौशल्या दोनों का अपहरण कर लिया और उन्हें लंका स्थित अपने महल के दो अलग अलग कमरों में बंद कर ब्रह्म लोक चला गया और हंसते हुए ब्रह्मा जी से पूछा कि क्या दोनों का विवाह हो गया ब्रह्मा जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि रावण, विधि का विधान अटल होता है विषय गति टारे ते नाही टरी ।उन्होंने कहा कि तुम्हारी पत्नी मंदोदरी ने दोनों का यथा समय विवाह करा दिया है । इसके बाद रावण वहां से लंका लौटा । उसने दोनों को उनके राज्य तो भेज दिया लेकिन दशरथ को इस काबिल नही छोड़ा कि वे पुत्र प्राप्ति में सफल हो सकें। भगवान राम का जन्म श्रृंगी ऋषि द्वारा कराए गए पुत्रेष्टि यज्ञ की खीर से हुआ था। उस राम के जन्म को जिसका अपना दार्शनिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है  जो राम लोगोंके  मन में रमे  है।जिस नाम के सहारे देश की आजादी की लड़ाई लड़ी गई,जिस राम को सभी नामों से श्रेष्ठ कहागया है,उस राम के जैम को,उनकी जन्मभूमि को 
इस देश की अदालतों में खूब चुनौती दी गयी । भगवान राम ने जन्म के समय ही अपनी माँ को अपना चतुर्भुज स्वरूप दिख दिया था और माता कौशल्या को प्राथना करनी पड़ी थी कि वह बालक स्वरूप में आ जाएं जिन प्रभु श्री राम के जन्म पर उनकी एक झलक पाने के लिए भगवान सूर्य का रथ रुक गया था और महीने भर का एक दिन हुआ था उस प्रभु श्री राम की जन्म जयंती पर उनके लिए एक अदद आशियाना बनाने की अपेक्षा इन देश का धर्म परायण समाज कर रहा है । मास दिवस कर दिवस भा मरम ना जाने कोय रथ समेत रवि थाकेउ निसा कवन विधि होय भगवान शिव ने माता पार्वती से भगवान राम की लीला का वर्णन करते हुए कहा है कि उनकी लीला देवताओं के लिए हितकारी और दैत्यों को वोमोहित करने वाली है उनकी कथा असमंजस के पक्षी को उड़ा देने वाली है राम कथा सुंदर करतारी संसय विहग उड़ावन हरि राम सहज प्रकाश स्वरूप भगवान हैं ब्रम्हा हैं परमानंद सचिदानंद घन परमात्मा हैं ऐसे भगवान राम अपनी जन्म स्थली से अन्य भवन में वाराणसी से बुलाये गए 22 वेदपाठी ब्राम्हड़ द्वारा अलग भवन में इसलिए स्थापित किये जा रहे हैं कि राम जन्म भूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण किया जा सके जब जागे तभी सवेरा  राम भक्तों के झांसे में आकर उनकी बात पर भरोसा कर भगवान राम 6 दिसम्बर 2090 से ही बेघर हैं टेंट में रह रहे हैं लेकिन लगता है कि अब उनके भी अच्छे दिन आ गए हैं। उनके भव्य मंदिर के निर्माण के साथ ही अयोध्या में एक नई संस्कृति और सभ्यता का विकास होगा सरकार का दावा है कि वह अयोध्या को उसका पुरातन गौरव पुरातन स्वरूप प्रदान करेगी यह सब कितना पूरा होगा, यह तो नही कहा जा सकता लेकिन इतना तय हैं कि भगवान राम की नगरी अयोध्या भगवान विष्णु के चक्र पर बसी अयोध्या एक बार फिर विश्व मानव को सत्य, न्याय,आदर्श, मर्यादा और सिद्धान्त का पाठ पढ़ाएगी।भगवान राम के आचरण से समाज जीवंत और जागृत होता है ,निरहंकारिता का जीवन जीता है । प्राणी मात्र के उद्धार की भावना बलवती हो,यही तो राम के जन्म का अभीष्ट है।राम एक संस्कार भाव हैं।मानवोचित विचार और सम्यक जीवन दर्शन हैं।राम  नीति,धर्म की प्रेरणा हैं।राम के भक्त के लिए,उनकी जीवनचर्या से सबक लेने वाले के लिए संसार में कुछ भी अलभ्य नहीं है। राममयता में ही इस जीव जगत का कल्याण मुमकिन है। राम के होने का मतलब ही संसार का होना है।राममंदिर बनेगा तो न केवल उससे अयोध्या का गौरव बढ़ेगा बल्कि राम की परंपरा में जीने वाले,इनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेने  वाले उनके भक्त भी गौरवान्वित होंगे।इस मंदिर के निर्माण से आस पास के क्षेत्रों और कस्बों का भी विकास होगा। राम मंदिर निर्माण में अब रंच मात्र भी विलंब उचित नहीं है।लेकिन साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि राम का मंदिर अयोध्या के एक छोटे से भूखंड पर ही नहीं,मानव मात्र के दिल में भी बनना चाहिए।

अशोक पाण्डेय